Content: सावन का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है और भगवान शिव को समर्पित है। साल 2026 में सावन 30 जुलाई (गुरुवार) से शुरू होकर 28 अगस्त (शुक्रवार) को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। यह तारीख उत्तर भारत यानी पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार है, जिसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में माना जाता है।
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महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे दक्षिण व पश्चिम भारत के राज्यों में अमांत कैलेंडर का पालन होता है, जहां श्रावण मास 13 अगस्त से 11 सितंबर 2026 तक रहेगा।
इस साल सावन में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं — 3, 10, 17 और 24 अगस्त। इन दिनों शिव भक्त व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हैं।
सावन का धार्मिक महत्व समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है, जब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए विष का पान किया था और उनका कंठ नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। देवताओं ने उनके शरीर को शीतल रखने के लिए जल अर्पित किया — यही परंपरा आज जलाभिषेक के रूप में निभाई जाती है।
सावन के दौरान कांवड़ यात्रा, हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व भी आते हैं। भक्त इस महीने सात्विक भोजन करते हैं, प्याज-लहसुन से परहेज करते हैं और शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
अगर आप सावन 2026 की तारीखों को लेकर असमंजस में हैं, तो याद रखें — तारीख का चुनाव आपके क्षेत्र के पंचांग (पूर्णिमांत या अमांत) पर निर्भर करता है। अपने स्थानीय पंडित या मंदिर से पुष्टि जरूर करें।
FAQs
सावन 2026 कब से शुरू हो रहा है?
उत्तर भारत में सावन 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा।
दक्षिण भारत में सावन की तारीख अलग क्यों है?
दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत कैलेंडर मानते हैं, जहां श्रावण 13 अगस्त से 11 सितंबर तक रहेगा।
सावन 2026 में कितने सोमवार हैं?
कुल 4 सोमवार — 3, 10, 17 और 24 अगस्त।
सावन क्यों मनाया जाता है?
यह भगवान शिव को समर्पित महीना है, जो समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा है।