शिलाजीत हिमालय की चट्टानों से रिसने वाला एक काला, चिपचिपा पदार्थ है। इसे बनने में सदियाँ लगती हैं। अब सोचिए, जो चीज़ इतनी दुर्लभ है, वो ₹199 की 60 कैप्सूल वाली बोतल में कैसे आ जाती है?
भारत में “shilajit capsule” इस समय सबसे ज़्यादा खोजे जाने वाले आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स में से एक है। और जहाँ डिमांड ज़्यादा होती है, वहाँ मिलावट भी ज़्यादा होती है।
कच्चा, बिना शुद्ध किया शिलाजीत फायदे की जगह नुकसान कर सकता है, क्योंकि उसमें भारी धातुएँ (heavy metals) और मिट्टी हो सकती है। इसलिए खरीदने से पहले लेबल पर ये 6 चीज़ें ज़रूर देखिए।
पहले समझिए: शिलाजीत में होता क्या है
शिलाजीत पेड़-पौधों के हज़ारों साल तक चट्टानों के बीच दबे रहने और धीरे-धीरे सड़ने से बनता है। गर्मियों में यह पहाड़ों की दरारों से राल (resin) की तरह रिसता है।
इसमें मुख्य रूप से फुल्विक एसिड, ह्यूमिक तत्व और कई प्राकृतिक खनिज होते हैं। आयुर्वेद में इसे रसायन माना गया है, यानी ऐसा पदार्थ जो पूरे शरीर को पोषण दे और उम्र के असर को धीमा करने में मदद करे। चरक संहिता में भी शिलाजीत की बहुत तारीफ की गई है।
लेकिन ये सारे फायदे सिर्फ शुद्ध शिलाजीत के हैं। मिलावटी या कच्चा शिलाजीत इनमें से कुछ नहीं देता।
1. “शोधित शिलाजीत” लिखा है या नहीं
आयुर्वेद में शिलाजीत को इस्तेमाल से पहले शोधन (शुद्धिकरण) करना ज़रूरी बताया गया है। लेबल पर “Shuddha Shilajit” या “Purified Shilajit” लिखा होना चाहिए। सिर्फ “Shilajit” लिखा हो, तो सवाल पूछिए।
2. फुल्विक एसिड कितना है
शिलाजीत का मुख्य सक्रिय तत्व फुल्विक एसिड माना जाता है। अच्छे ब्रांड इसका प्रतिशत लेबल या वेबसाइट पर बताते हैं। प्रतिशत कहीं नहीं लिखा, तो क्वालिटी का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है।
3. हेवी मेटल का लैब टेस्ट
सबसे ज़रूरी सवाल यही है। कंपनी से पूछिए कि क्या उनके शिलाजीत का लेड, आर्सेनिक और मरकरी के लिए टेस्ट हुआ है। भरोसेमंद ब्रांड यह जानकारी देने से नहीं कतराते।
4. एक कैप्सूल में असल में कितना शिलाजीत
कई कैप्सूल में शिलाजीत कम और फिलर ज़्यादा होता है। लेबल पर देखिए कि हर कैप्सूल में कितने mg शिलाजीत या उसका एक्सट्रैक्ट है।
5. लाइसेंस नंबर
आयुर्वेदिक दवा पर AYUSH मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर, और फ़ूड सप्लीमेंट पर FSSAI नंबर होना चाहिए। नंबर नहीं है, तो प्रोडक्ट न खरीदें।
6. “Gold” और “1000x Power” जैसे दावों से सावधान
स्वर्ण भस्म आयुर्वेद का एक पारंपरिक घटक है, लेकिन सिर्फ “Gold” शब्द से कोई प्रोडक्ट बेहतर नहीं हो जाता। “तुरंत असर” या “100% गारंटी” जैसे दावे भरोसे की नहीं, शक की वजह हैं।
घर पर शिलाजीत जांचने के तरीके: कितने भरोसेमंद?
इंटरनेट पर कई घरेलू टेस्ट बताए जाते हैं। जैसे, असली शिलाजीत रेज़िन गुनगुने पानी में बिना कोई रेत छोड़े घुल जाता है, और गर्म करने पर नरम हो जाता है।
ये तरीके थोड़ा अंदाज़ा ज़रूर देते हैं, लेकिन मेरी सलाह है कि इन पर पूरा भरोसा न करें। कैप्सूल के अंदर का पाउडर इनसे जांचा भी नहीं जा सकता। हेवी मेटल जैसी असली खतरनाक मिलावट सिर्फ लैब टेस्ट से ही पकड़ में आती है। इसलिए ब्रांड से टेस्ट रिपोर्ट मांगना सबसे सही जांच है।
शिलाजीत अकेले लें या कॉम्बिनेशन में?
“Shilajit ashwagandha” भारत में शिलाजीत से जुड़ी सबसे बड़ी सर्च में से एक है। इसकी वजह है: आयुर्वेद में शिलाजीत को अक्सर दूसरी रसायन और वृष्य जड़ी-बूटियों के साथ दिया जाता है, जैसे अश्वगंधा, सफेद मूसली, गोक्षुर या कौंच बीज।
अलग-अलग कई बोतलें खरीदने की जगह एक संतुलित फॉर्मूला अक्सर सस्ता और आसान पड़ता है।
सर्दियों में शिलाजीत क्यों
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों की शुरुआत (हेमंत ऋतु) में पाचन शक्ति सबसे अच्छी होती है। इसलिए इसे बल बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियाँ शुरू करने का सही समय माना जाता है। अक्टूबर-नवंबर इसके लिए अच्छा मौसम है।
कीमत का असली हिसाब: बोतल नहीं, रोज़ का खर्च देखिए
ज़्यादातर लोग बोतल की कीमत देखकर फैसला कर लेते हैं। सही तरीका है प्रति दिन का खर्च निकालना।
उदाहरण के लिए, ₹600 की बोतल में 60 कैप्सूल हैं और रोज़ 2 कैप्सूल लेने हैं। तो बोतल 30 दिन चलेगी और रोज़ का खर्च ₹20 आएगा। वहीं ₹300 की बोतल में 30 कैप्सूल हैं और रोज़ 2 लेने हैं, तो वह सिर्फ 15 दिन चलेगी।
यानी सस्ती दिखने वाली बोतल हमेशा सस्ती नहीं होती। साथ में यह भी देखिए कि उस कीमत में आपको कितनी जड़ी-बूटियाँ और कितनी मात्रा मिल रही है।
Aarogya Jeevanam Pourush Capsules
अगर आप शिलाजीत के साथ दूसरी वृष्य जड़ी-बूटियों का संतुलित फॉर्मूला ढूंढ रहे हैं, तो हमारा Pourush Capsule देखिए।
- सामग्री: अश्वगंधा, शिलाजीत, सफेद मूसली और गोक्षुर
- कैसे लें: रोज़ 1-2 कैप्सूल, खाने के बाद पानी या दूध के साथ, या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार
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किन्हें शिलाजीत नहीं लेना चाहिए
- गाउट या बढ़ा हुआ यूरिक एसिड वाले लोग
- किडनी स्टोन या किडनी की बीमारी वाले
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ
- दिल, BP या डायबिटीज़ की दवा ले रहे लोग, डॉक्टर से पूछे बिना नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शिलाजीत कैप्सूल अच्छा है या रेज़िन (Resin)? रेज़िन ज़्यादा पारंपरिक है, लेकिन उसकी मात्रा नापना मुश्किल होता है। कैप्सूल में खुराक तय रहती है और लेना आसान है।
शिलाजीत किस समय लें? आमतौर पर सुबह, गुनगुने दूध या पानी के साथ। प्रोडक्ट लेबल के निर्देश को प्राथमिकता दें।
क्या शिलाजीत रोज़ ले सकते हैं? तय मात्रा में और सही अवधि तक लिया जा सकता है। लंबे समय तक लेने से पहले वैद्य से सलाह लें।
क्या महिलाएँ शिलाजीत ले सकती हैं? आयुर्वेद में शिलाजीत को सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं माना गया है। फिर भी गर्भावस्था, स्तनपान या किसी बीमारी में इसे केवल डॉक्टर की सलाह से ही लें।
आखिरी बात
शिलाजीत में सबसे बड़ा फर्क कीमत का नहीं, शुद्धता का है। अगली बार कोई भी बोतल उठाएँ, तो पहले लेबल पलटिए और ये 6 चीज़ें मिलाइए।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है, यह किसी बीमारी का इलाज या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।