दिन भर दिमाग़ काम में उलझा रहता है। रात को जैसे ही सब शांत होता है, वह सारे अधूरे काम एक साथ सामने रख देता है। इसलिए दिमाग़ को “बंद” करने की नहीं, उसे कोई आसान काम देने की ज़रूरत है।
6 तरकीबें जो काम करती हैं
- वरी डंप (सोने से 1 घंटा पहले): काग़ज़ पर कल के काम और सारी चिंताएँ लिख दें। दिमाग़ को भरोसा हो जाता है कि अब याद रखने की ज़रूरत नहीं।
- उल्टी गिनती: 100 से 3-3 कम करते हुए गिनें (100, 97, 94…)। इतना काम दिमाग़ को चिंता के लिए जगह नहीं छोड़ता।
- साँस का लंबा उछ्वास: साँस छोड़ने का समय लेने से दोगुना रखें (4 गिनती में लें, 8 में छोड़ें)।
- स्क्रीन कर्फ़्यू: सोने से 30–60 मिनट पहले फ़ोन दूसरे कमरे में चार्ज पर लगाएँ।
- “अभी नहीं” नियम: कोई चिंता आए तो मन में कहें “इस पर कल सुबह 10 बजे सोचूँगा” और साँस पर लौट आएँ।
- 20 मिनट का नियम: 20 मिनट में नींद न आए तो उठकर धीमी रोशनी में कुछ हल्का पढ़ें, फिर लौटें। बिस्तर पर करवटें बदलना दिमाग़ को बिस्तर और बेचैनी को जोड़ना सिखाता है।
Overactive mind के लिए एक आसान ध्यान
लेटकर हर साँस छोड़ते समय मन में “शांत” कहें। हर 10 साँस पर शरीर का एक हिस्सा ढीला करें: पहले पैर, फिर पेट, फिर कंधे, फिर चेहरा। पूरा 10 मिनट का रूटीन Meditation for Sleep में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रात को ही ज़्यादा विचार क्यों आते हैं? दिन में काम और शोर ध्यान बाँटते हैं। रात को कोई दूसरा काम नहीं होता, तो अधूरे विचार सामने आ जाते हैं।
क्या म्यूज़िक से मदद मिलती है? धीमा, बिना शब्दों का संगीत कई लोगों की मदद करता है। टाइमर लगाएँ ताकि फ़ोन हाथ में न लेना पड़े।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है। लगातार नींद न आए तो डॉक्टर से मिलें।