किसी ने कहा “रात को ध्यान से दिमाग़ जाग जाता है”, किसी ने कहा “ध्यान में सो जाना पाप है”। इतनी सलाहों में सच क्या है? यहाँ 7 आम मिथक और उनका सीधा जवाब है।
| मिथक | सच |
|---|---|
| 1. रात को ध्यान से दिमाग़ जाग जाता है | आराम वाले ध्यान (बॉडी स्कैन, धीमी साँस) शरीर को शांत करते हैं। सिर्फ़ जोश वाले प्राणायाम (कपालभाति) रात को न करें। |
| 2. ध्यान में सो जाना ग़लती है | रात को यही तो लक्ष्य है। दिन का ध्यान बैठकर करें ताकि सजग रहें। |
| 3. मन खाली करना ज़रूरी है | विचार आएँगे। उन्हें देखकर साँस पर लौटना ही अभ्यास है। |
| 4. एक घंटा करें तभी असर होगा | रोज़ 5–10 मिनट काफ़ी है। नियमितता लंबाई से ज़्यादा अहम है। |
| 5. पहली रात से नींद आने लगेगी | ज़्यादातर लोगों को 2–4 हफ़्ते में फ़र्क दिखता है। |
| 6. ध्यान नींद की दवा की जगह ले सकता है | ध्यान मदद करता है, पर दवा अपने आप न छोड़ें। डॉक्टर से पूछकर ही बदलाव करें। |
| 7. ध्यान सिर्फ़ धार्मिक लोगों के लिए है | यह मन की ट्रेनिंग है, किसी भी उम्र और विश्वास के लोग कर सकते हैं। |
तो क्या सोने से पहले ध्यान करना सही है?
हाँ। सोने से पहले का ध्यान शरीर को सतर्क मोड से आराम मोड में लाता है, और 2015 के एक रैंडमाइज़्ड ट्रायल में माइंडफुलनेस से नींद की क्वालिटी सुधरी भी। शुरुआत के लिए 10 मिनट का रूटीन Meditation for Sleep में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सोने से कितनी देर पहले ध्यान करें? बिस्तर पर लेटने के ठीक बाद, या उससे 15 मिनट पहले बैठकर।
क्या खाना खाकर तुरंत ध्यान कर सकते हैं? हल्का ध्यान कर सकते हैं, पर प्राणायाम खाने के 2 घंटे बाद करें।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है, मेडिकल सलाह नहीं। स्रोत: MedicalResearch.com